एक महीने में मोबाइल, मंगलसूत्र, पर्स की झपटमारी; पत्रकार की बाइक तक चोरी, गिरफ्तारी के बाद भी नहीं थम रहीं वारदातें
देवब्रत मंडल

गया, 17 जून 2026। रेलवे की पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था के तमाम दावों के बीच गया जंक्शन पर यात्रियों के साथ आपराधिक घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। यहां कई गिरोह सक्रिय हैं और अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। जून महीने में हुई घटनाओं ने सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी है। आम यात्रियों व लोगों का कहना है कि सोना लूटकांड के बाद बदले गए पुलिस पदाधिकारी और रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारियों के योगदान देने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि गया जंक्शन अपराधमुक्त हो सकता है लेकिन उनकी उम्मीदें भी अब टूटने लगी है।
गंगा-दामोदर एक्सप्रेस: अपराधियों की पहली पसंद
ट्रेन नंबर 13330 गंगा-दामोदर एक्सप्रेस अपराधियों के लिए सॉफ्ट टारगेट बन गई है। इसी ट्रेन में जून में 4 बड़ी वारदातें हुईं:
- S-5 कोच, बर्थ-11: यात्री का मोबाइल गायब।
- S-6 कोच, बर्थ-4: महिला यात्री के गले से मंगलसूत्र झपटा। ट्रेन खुलते ही वारदात।
- S-3 कोच, बर्थ-12: महिला यात्री का मोबाइल झपटकर अपराधी फरार।
- S-1 कोच, सीट-35: यात्री की जेब से मोबाइल फोन चोरी।
दूसरी ट्रेनों में भी वारदात
- 13307 गंगा-सतलुज एक्सप्रेस: S-1 कोच में बर्थ 73, 74, 78 पर धनबाद से DDU जा रहे परिवार का लेडीज पर्स चोरी। पर्स में 3000 रुपये कैश था। गया जंक्शन पहुंचने से कुछ पहले घटना।
- 15137 ट्रेन: B-1 कोच, बर्थ-44 के पास से बिहारशरीफ से डेहरी-ऑन-सोन जा रहे यात्री का पिट्ठू बैग चोरी।
- प्लेटफॉर्म पर: एक यात्री का लहसुन का बोरा गायब हुआ, बाद में मिल गया।
महाबोधि एक्सप्रेस में सीट बेचने वाला गिरफ्तार
महाबोधि एक्सप्रेस में सीट बेचने का मामला भी सामने आया। पीड़ित महिला यात्री की शिकायत पर रफीगंज निवासी दीपक कुमार को गिरफ्तार किया गया। आरोपी पहले गया जंक्शन पर अवैध रूप से पानी बेचता था।
NRI महिला और पत्रकार भी बने शिकार
- अप्रवासी भारतीय महिला श्वेता शर्मा के बच्चे का पासपोर्ट समेत सामान चोरी।
- पुष्पा देवी नामक महिला यात्री के साथ भी चोरी।
- दो पत्रकार भी शिकार: आकाशवाणी अरुणाचल प्रदेश में कार्यरत पत्रकार की बाइक गया जंक्शन के बाहरी परिसर, RMS ऑफिस के पास से चोरी हो गई। वहीं एक का पर्स प्लेटफॉर्म पर गायब हो गया।
‘शिकायतें कम, घटनाएं ज्यादा’
कई यात्री ऐसी घटनाओं को अपनी लापरवाही समझकर शिकायत दर्ज नहीं कराते। इससे अपराध का सही आंकड़ा सामने नहीं आता।
गिरोह के कुछ सदस्य और पॉकेटमार गिरफ्तार भी हुए हैं, लेकिन गया जंक्शन पर अपराधियों का बोलबाला कायम है। यात्रियों का सामान गायब होने के बाद उन्हें पुलिस-कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
‘ट्रेन में सुखद यात्रा’ की बात अब बेमानी लगती है। यात्री सवाल उठा रहे हैं कि जब सुरक्षा के इतने दावे हैं तो गया जंक्शन पर रोज अपराध क्यों हो रहे हैं?
