देवब्रत मंडल

गया। गया रेल थाना से जुड़े चर्चित सोना लूटकांड में नामजद बनाए गए रेल थाना के सिपाहियों को बड़ा झटका लगा है। इस मामले में आरोपित सिपाहियों की अग्रिम जमानत याचिका पटना हाईकोर्ट ने शनिवार को खारिज कर दी। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद मामले में नामजद पुलिसकर्मियों पर गिरफ्तारी की आशंका बढ़ गई है और जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई पर भी नजर टिक गई है।
यह मामला उस सनसनीखेज सोना लूटकांड से जुड़ा है, जिसमें बड़ी मात्रा में सोना लूटे जाने के आरोप के बाद गया रेल थाना की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई थी। जांच के दौरान रेल थाना के कुछ पुलिसकर्मियों के नाम सामने आने के बाद उन्हें केस में नामजद आरोपी बनाया गया था। अब अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने से यह स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि अदालत ने प्रथमदृष्टया मामले की गंभीरता को देखते हुए राहत देने से इनकार किया है।
क्या है मामला
गया रेल थाना से जुड़ा यह सोना लूटकांड शुरू से ही काफी चर्चित रहा है। मामले में आरोप है कि सोना लूट की घटना के बाद पुलिस की भूमिका संदिग्ध पाई गई और जांच के क्रम में रेल थाना के कुछ सिपाहियों के नाम सामने आए। इसके बाद केस में उन्हें नामजद आरोपी बनाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियों ने कई स्तरों पर छानबीन की और पुलिस विभाग के भीतर भी इसको लेकर हलचल बनी रही।
सूत्रों के अनुसार, केस में नाम आने के बाद संबंधित सिपाहियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पटना हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। शनिवार को इस पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। अदालत के इस आदेश को अभियोजन पक्ष के लिए अहम माना जा रहा है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी कानूनी मुश्किल
अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब नामजद सिपाहियों के सामने सरेन्डर कर नियमित जमानत लेने या फिर जांच एजेंसी की कार्रवाई का सामना करने की स्थिति बन सकती है। ऐसे मामलों में हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद पुलिस या संबंधित जांच एजेंसी आरोपितों के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया तेज कर सकती है।
इस घटनाक्रम के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। क्योंकि गया रेल थाना से जुड़े इस कांड ने पहले ही रेलवे पुलिस की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। अब अदालत के ताजा आदेश ने इस केस को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।
जांच और विभागीय कार्रवाई पर भी नजर
इस मामले में पहले से चल रही आपराधिक जांच के साथ-साथ विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की संभावना बनी हुई है। अगर जांच में नामजद पुलिसकर्मियों की संलिप्तता के ठोस साक्ष्य मिलते हैं, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई और कड़ी हो सकती है। वहीं, हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद जांच एजेंसियों का रुख और सख्त होने की संभावना जताई जा रही है।
आगे क्या
अब सबसे अहम सवाल यह है कि हाईकोर्ट से झटका मिलने के बाद नामजद सिपाही अगला कानूनी कदम क्या उठाते हैं। वे निचली अदालत में आत्मसमर्पण कर नियमित जमानत की अर्जी दे सकते हैं। दूसरी ओर, अगर जांच एजेंसी सक्रिय होती है तो गिरफ्तारी या अन्य कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी तेज हो सकती है।
गया रेल थाना के चर्चित सोना लूटकांड में पटना हाईकोर्ट का यह ताजा आदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता फिर सामने आई है। आने वाले दिनों में इस केस में पुलिस और अदालत—दोनों स्तरों पर हलचल तेज रहने की संभावना है।
तत्कालीन रेल थानाध्यक्ष की हुई थी गिरफ्तारी, आरोपी परवेज जेल में
बता दें इस कांड 334/25 में गया रेल थाना के तत्कालीन थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर राजेश कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया था जो जमानत पर जेल से बाहर निकल गए हैं। वहीं एक आरोपी परवेज आलम ने गया रेलवे कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया है जो न्यायिक हिरासत में गया के केंद्रीय कारा में बंद हैं।
गया के स्वर्ण व्यवसायी भी हो चुका है गिरफ्तार, बरामद हुआ था सोना
वहीं इसी केस में मोहित अग्रवाल उर्फ गोलू को एसआईटी की टीम ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था जो अभी जमानत पर जेल से छूट गया है। मोहित अग्रवाल उर्फ गोलू गया सराफा मंडी का कारोबारी है। जिस पर लूट का सोना खरीद बिक्री करने का आरोप है। जिसके पास से पुलिस ने कुछ सोना बरामद कर चुकी है।
घटना पिछले साल जोधपुर एक्सप्रेस में चलती ट्रेन में हुई थी
यह मामला 21 नवंबर 2025 की है। हावड़ा-बीकानेर जोधपुर एक्सप्रेस में कोडरमा स्टेशन जाकर गया रेल थाना के सिपाहियों एवं दो बाहरी व्यक्ति ने मिलकर यात्रा कर रहे सोने के एक व्यापारी मनोज कुमार सोनी के स्टाफ से एक किलोग्राम सोना लूट लिया था। इसके बाद गया रेल के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह को निलंबित करते हुए गिरफ्तार कर लिया गया था।
न्यायालय में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
स्मरण रहे कि इस बहुचर्चित सोना लूटकांड की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। जिसका नेतृत्व वर्तमान अपर रेल पुलिस अधीक्षक तत्कालीन पटना रेल डीएसपी मुख्यालय भास्कर रंजन कर रहे हैं। जिन्होंने न्यायालय में नामजद आरोपी बनाए गए सिपाहियों की जमानत याचिका खारिज करने के पक्ष में महत्वपूर्ण साक्ष्य पेश किए। जिसके बाद न्यायालय ने इसे बेहद गंभीर मामला मानते हुए आरोपियों की अपील को खारिज कर दिया है।
