‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ से हो रहा कायाकल्प, गया-डीडीयू समेत मंडल के प्रमुख स्टेशनों पर बढ़ाई जा रही यात्री सुविधाएं
देवब्रत मंडल

गया जी। कभी ब्रिटिशकालीन रेलवे व्यवस्था की पहचान रहे डीडीयू रेल मंडल के स्टेशनों की तस्वीर अब तेजी से बदलने जा रही है। रेलवे बोर्ड की अनुमति के बाद मंडल के 15 स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने की दिशा में काम आगे बढ़ रहा है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत होने वाला यह पुनर्विकास केवल स्टेशन भवन को नया रूप देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यात्रियों के लिए प्रवेश से लेकर प्लेटफार्म तक बेहतर और सुविधाजनक व्यवस्था विकसित की जाएगी। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप रेलवे अपने स्टेशनों को आधुनिक स्वरूप देने में जुटा है। इसी कड़ी में डीडीयू रेल मंडल भी पुराने ढांचे और औपनिवेशिक दौर की कार्यप्रणाली से आगे बढ़ते हुए आधुनिक यात्री सुविधाओं की ओर कदम बढ़ा रहा है।
414 किलोमीटर में फैला है डीडीयू मंडल
डीडीयू रेल मंडल का रेल नेटवर्क करीब 414 किलोमीटर में फैला है और इसका विस्तार उत्तर प्रदेश, बिहार तथा झारखंड तक है। ग्रैंड कार्ड रेल मार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा होने के कारण यह मंडल उत्तर भारत को पूर्वी भारत से जोड़ने में अहम भूमिका निभाता है।
मंडल में कुल 61 स्टेशन हैं। इनमें 43 गैर-उपनगरीय स्टेशन (एनएसजी) तथा 18 हॉल्ट शामिल हैं। यात्रियों की संख्या और स्टेशन की आय के आधार पर इनका अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकरण किया गया है।
यात्री दबाव के लिहाज से गया और डीडीयू अहम

पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन और गया जंक्शन को एनएसजी-2 श्रेणी में रखा गया है। इस श्रेणी में ऐसे स्टेशन आते हैं जिनकी वार्षिक आय 100 से 500 करोड़ रुपये तथा वार्षिक यात्री संख्या एक करोड़ से अधिक और दो करोड़ तक होती है।
गया जंक्शन धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्टेशन है, जबकि डीडीयू जंक्शन रेल परिचालन के लिहाज से मंडल का प्रमुख केंद्र है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार गया जंक्शन से सालाना करीब 88.27 लाख और डीडीयू जंक्शन से करीब 58.85 लाख यात्रियों का आवागमन होता है। दोनों स्टेशनों को मिलाकर सालाना करीब 1.47 करोड़ यात्रियों की आवाजाही होती है।
इस 15 स्टेशनों पर बदलेगी तस्वीर
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत मंडल के चंदौली मझवार, दुर्गावती, बिक्रमगंज, पीरो, भभुआ रोड, कुदरा, सासाराम, डेहरी आन सोन, अनुग्रह नारायण रोड, रफीगंज, गुरारू, हैदरनगर, मोहम्मदगंज, नबीनगर और जपला स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है।
पुनर्विकास के बाद इन स्टेशनों पर स्टेशन भवन, प्लेटफार्म, पार्किंग और सर्कुलेटिंग एरिया को बेहतर बनाया जाएगा। यात्रियों के लिए आधुनिक शौचालय, फुट ओवरब्रिज, शेल्टर, पेयजल और बैठने की सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इससे छोटे और मध्यम श्रेणी के स्टेशनों पर भी यात्रियों को आधुनिक रेलवे स्टेशन जैसा अनुभव मिलने की उम्मीद है।
गया में चल रहा बड़े स्तर का पुनर्विकास

गया जंक्शन का पुनर्विकास पहले से ही बड़े स्तर पर चल रहा है। स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं और नई वास्तुकला के साथ विकसित किया जा रहा है। वहीं डीडीयू जंक्शन के व्यापक विस्तार और पुनर्विकास को लेकर प्राथमिक तकनीकी अध्ययन जारी है।
डीडीयू मंडल के बाकी स्टेशन भी श्रेणीबद्ध
डीडीयू मंडल के डेहरी आन सोन, सासाराम और अनुग्रह नारायण रोड स्टेशन एनएसजी-3 श्रेणी में हैं। कुदरा, भभुआ रोड और जपला एनएसजी-4 में शामिल हैं। नबीनगर रोड, उंटारी रोड, रफीगंज, हैदरनगर, मोहम्मदगंज और गुरारू एनएसजी-5 श्रेणी में हैं, जबकि शेष 29 स्टेशन एनएसजी-6 में आते हैं। इसके अलावा मंडल में 18 हॉल्ट हैं, जिनमें सात एचजी-2 और 11 एचजी-3 श्रेणी के हैं।
कुल मिलाकर डीडीयू रेल मंडल में हो रहा यह बदलाव रेलवे स्टेशनों के पुराने ढांचे को आधुनिक यात्री केंद्रों में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले वर्षों में इन स्टेशनों की बदली हुई तस्वीर न सिर्फ यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देगी, बल्कि बदलते भारत और आधुनिक रेलवे की नई पहचान भी सामने रखेगी।
