विशेष निगरानी न्यायालय का फैसला, 19 साल पुराने रिश्वत कांड में दोषसिद्धि
न्यूज़ डेस्क

पटना/मुंगेर। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (एसवीयू) की कार्रवाई में दर्ज 19 वर्ष पुराने रिश्वतखोरी के मामले में विशेष निगरानी न्यायालय, भागलपुर ने तत्कालीन समर्पित राजस्व कर्मचारी अशोक पासवान को दोषी करार देते हुए दो वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की दो धाराओं के तहत ₹10-10 हजार, कुल ₹20 हजार का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा मंगलवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह मामला निगरानी थाना कांड संख्या-85/2007 (विशेष वाद संख्या-27/2007) से संबंधित है।
रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा गया था कर्मचारी
मामले के अनुसार, मुंगेर जिले के बरियारपुर थाना क्षेत्र के निवासी सीताराम मंडल ने शिकायत दर्ज कराई थी कि तत्कालीन समर्पित राजस्व कर्मचारी अशोक पासवान ने तीन केवाला दाखिल-खारिज करने के एवज में ₹1,800 रिश्वत की मांग की थी। सत्यापन के बाद निगरानी टीम ने 12 जुलाई 2007 को आरोपी को ₹1,500 रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया था।
आठ गवाहों की गवाही के बाद हुई दोषसिद्धि
मामले की जांच तत्कालीन पुलिस निरीक्षक उपेन्द्र प्रसाद सिंह ने की थी और समय पर आरोप पत्र दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। विशेष लोक अभियोजक रामवदन कुमार चौधरी ने प्रभावी पैरवी की, जिसके आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराया।
वर्ष 2026 में भ्रष्टाचार के 10 मामलों में सजा
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक भ्रष्टाचार के 10 मामलों में अदालत द्वारा सजा सुनाई जा चुकी है। ब्यूरो ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में अभियोजन की कार्रवाई लगातार जारी है।
