देवब्रत मंडल

देश 15 अगस्त को आजादी का जश्न मनाएगा। हर गली-मोहल्ले में तिरंगा लहराएगा। लेकिन इसी जश्न की पूर्व संध्या पर magadhlive की नजर जब गया जंक्शन के लोको कॉलोनी स्थित गांधी मंडप पर पड़ी, तो मन व्यथित हो गया।
यह वही जगह है जहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आदमकद प्रतिमा स्थापित है। इस प्रतिमा का अनावरण तत्कालीन रेलमंत्री बाबू जगजीवन राम ने किया था। पूर्व मध्य रेलवे के डीयू मंडल का यह क्षेत्र रेलवे की गौरवशाली विरासत का हिस्सा माना जाता था।
आज की तस्वीर: जलजमाव और उपेक्षा
आज गांधी मंडप की हालत बद से बदतर है। चारों ओर जलजमाव है। उसी गंदे पानी के बीच बापू की प्रतिमा विराजमान है। न मंडप की छत दुरुस्त है, न आसपास साफ-सफाई।
स्थानीय लोग बताते हैं कि अब इस जगह को पूछने वाला कोई नहीं।
सिर्फ 4 दिन याद आते हैं बापू
स्थानीय वार्ड पार्षद, कुछ युवा और कुछ सेवानिवृत्त रेलकर्मी ही इस स्थान पर साल में 4 बार आते हैं:
- 2 अक्टूबर – गांधी जयंती
- 30 जनवरी – गांधी पुण्यतिथि
- 15 अगस्त – स्वतंत्रता दिवस
- 26 जनवरी – गणतंत्र दिवस
इन मौकों पर सिर्फ श्रद्धा सुमन अर्पित कर सभी लौट जाते हैं। बाकी 361 दिन यह स्थल वीरान और उपेक्षित पड़ा रहता है।
सवाल: क्या यही हमारी श्रद्धांजलि है?
1947 में देश आजाद हुआ। आजादी दिलाने वालों की भूमिका पर बहस हो सकती है। देश 1947 से 2026 तक बहुत बदला, उस पर भी बहस हो सकती है।
लेकिन जिस बापू ने हमें अहिंसा और सत्य का रास्ता दिखाया, जिनके नाम पर यह मंडप बना, क्या उनकी प्रतिमा की यह हालत उचित है?
रेलवे का हिस्सा होने के बावजूद गांधी मंडप आज उपेक्षा का शिकार है। 15 अगस्त पर तिरंगा फहराने से पहले जरूरत है कि हम अपनी विरासतों को भी संभालें।
क्या आजादी का असली जश्न यही है? बापू की विरासत को बचाना भी हमारी जिम्मेदारी है।
