देवब्रत मंडल

बिहार में बदलाव हो गया। नीतीश कुमार आउट, सम्राट चौधरी इन। खरमास खत्म हो गया। डॉ भीमराव आंबेडकर को, संविधान को अपने अधिकारों को लोगों ने याद किया। सतुआनी मना लिए लोग। 15 अप्रैल को बिहार सरकार के नए मुखिया सम्राट चौधरी का बनना लगभग तय हो गया। इसके बाद नई कैबिनेट। इस बदलाव की बिसात विधानसभा चुनाव के समय ही बिछ गई थी। परिणाम अब सामने आया है। अब आईए जानते हैं इधर से भी कुछ। बिहार में बदलाव के साथ क्या गया नगर निगम के मंत्रिमंडल में भी बदलाव होंगे? बदलाव की बिसात यहां भी 2022 के चुनाव के समय ही बिछ गई थी। कई वार्ड में बदलाव देखने को मिले। साथ ही नगर निगम की सशक्त स्थायी समिति का गठन भी हो गया। बीच में उपचुनाव हुए और बदलाव देखने को मिले।
इसी दिन बदलाव की पड़ गई थी नींव
बिहार सरकार ने सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों के चयन में एकाधिकार को खत्म कर दिया। ये अधिकार यूं ही या कहें एकाएक खत्म नहीं हुआ। इसके पीछे भी एक वजह थी। वजह यह रही कि भरी सदन में अपनी मर्यादा के साथ अन्य सभी शेष पार्षदों के हितों की रक्षा का बीड़ा एक सशक्त स्थायी समिति के सदस्य ने उठाया। पहले तो निकाले जाने की बात थी लेकिन उन्होंने स्वयं इस्तीफा दे दिया। संकल्प लिया। बस! इसी दिन बदलाव की नींव पड़ गई थी।
अध्यादेश के आगे विरोधियों की आवाज कमजोर पड़ गई
काफी मेहनत करनी पड़ी। सरकार ने पूर्व के निर्णयों और नियमों को खत्म कर दिया और सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों का मनोनयन की जगह निर्वाचन कराने का निर्णय लिया। इस नियम से पूरे बिहार के नगर निकायों में पार्षदों और मुख्य एवं उपमुख्य पार्षदों के बीच अदृश्य करंट दौड़ गई। सरकार के निर्णयों के विरुद्ध आवाज जोर पकड़ने लगी। पर ये आवाज अध्यादेश के आगे दब गई या कमजोर पड़ गई। अंततः पार्षदों को वोट के जरिए सदस्यों के चुनाव करने का अधिकार प्राप्त हो गया। जो कल तक मुख्य पार्षद का एकाधिकार हुआ करता था।
वार्ड पार्षद के इस्तीफे के बाद परिस्थिति बदली
बात गया नगर निगम की है तो यहां वार्ड पार्षद धर्मेंद्र कुमार ने सशक्त स्थायी समिति के पद से त्यागपत्र दे दिया। सात सदस्यों सहित मेयर और डिप्टी मेयर(दोनों पदेन) वाली सशक्त स्थायी समिति में हलचल पैदा हो गई। अब चुनाव की तिथि भी निर्धारित की जा चुकी है। 17 अप्रैल को इसके लिए चुनाव होना है। सात सदस्यों को वार्ड पार्षद गुप्त मतदान के जरिए चुनाव करेंगे। जो मनोनीत किए गए थे उनकी भी सदस्यता चुनाव के दिन तक ही मान्य होंगे। परिणाम आने के बाद ही आगे की तस्वीर साफ होगी।
एक खेमे से सात तो दूसरे खेमे से चार के उम्मीदवारी की चर्चा
बहरहाल, जो चर्चा में है, उसके अनुसार दस प्रत्याशियों के नाम सामने आए हैं। जिनमें छह वे सभी सदस्य(वार्ड पार्षद) हैं, इसके अलावा धर्मेंद्र कुमार के इस्तीफे के कारण रिक्त पद पर अन्य कोई और हो सकते हैं। इन सभी को मेयर ने मनोनीत किया था। वहीं दूसरे खेमे में चार प्रत्याशियों के नाम की चर्चा है। जिसमें एक प्रबल दावेदार वार्ड पार्षद धर्मेंद्र कुमार माने जा रहे हैं। इनके अलावा वार्ड पार्षद ओमप्रकाश सिंह, नैयर हुसैन तथा सारिका वर्मा का नाम भी इस गुट से सामने आ रहे हैं। कई और पार्षद भी मन बना रहे हैं लेकिन जबतक नामांकन दाखिल नहीं होता तब तक कुछ भी नहीं कहा जा सकता है।
कई पार्षद व उनके प्रतिनिधि सैर सपाटे पर निकल गए
बहरहाल, यहां भी बदलाव के बयार बह रहे हैं, क्रॉस वोटिंग का खतरा बना हुआ है। पार्षदों के बीच जनसंपर्क अभियान भी चलाया जा रहा है। कुछ पार्षदों और उनके प्रतिनिधियों को सैर सपाटे पर पर भेज दिए जाने की चर्चा है। कुछ पर पॉलिटिकल प्रेसर भी है। कुछ पार्षद न्यूट्रल भी हैं। यहां 53 वार्ड वार्ड पार्षद हैं। सभी को सात वोट डालने का अधिकार है। हो सकता है कुछ अपने पसंद के उम्मीदवारों को वोट करने के बाद शेष बचे उम्मीदवार को वोट भी नहीं करेंगे। ऐसी चर्चा है। फिलहाल 17 अप्रैल तक इंतजार करना होगा।
