विशेष रिपोर्ट |देवब्रत मंडल

गया जंक्शन पर यात्रियों के साथ कब क्या हो जाए, कहना मुश्किल है। पिछले तीन महीनों का रिकॉर्ड देखें तो प्लेटफॉर्म से लेकर ट्रेन में चढ़ते-उतरते वक्त यात्री कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। मामूली चोरी-पॉकेटमारी की घटनाएं तो रोज की बात हो गई हैं।
शिकायतें बढ़ीं, कार्रवाई कम
आम यात्री पुलिस के झंझट से बचने के लिए थाना नहीं जाते, लेकिन जागरूक यात्री अब रेल मदद ऐप और 139 पर शिकायत दर्ज करा रहे हैं। चलती ट्रेन में घटना होने पर लोग गंतव्य स्टेशन के थाने में FIR करवा रहे हैं।
‘न विराम’ लग रहा है, न ‘अल्पविराम’
कार्रवाई भी हो रही है, पर घटनाओं की संख्या और आरोपियों की गिरफ्तारी का अनुपात देखें तो अंतर बहुत बड़ा है। गया रेल थाना क्षेत्र छोड़ दें तो पूरे गया रेल पुलिस अनुमंडल में दर्ज आपराधिक मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। समीक्षा बैठकें हो रही हैं, पर अपराध पर न ‘विराम’ लग रहा है, न ‘अल्पविराम’।
पीएमओ और मानवाधिकार आयोग तक जा रही शिकायत
अब तो बात है कि यात्रियों के साथ आपराधिक घटनाओं की शिकायत केवल थाने तक ही सीमित नहीं रह गई है। पीड़ित यात्री पीएमओ और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक अपनी शिकायत पहुंचा देते हैं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी शिकायत दर्ज हो रही है। कनाडाई महिला श्वेता शर्मा के साथ हुई घटना एक शर्मनाक घटना का रूप ले लिया। जिन्होंने अपनी शिकायत काफी दूर तक लेकर चली गईं। गया रेल थाना का सोना लूटकांड तो आज भी न्यायालय में चल रहा है।
वर्दी पर भी “दाग“
सोना लूटकांड के बाद गया रेल थाना सबसे ज्यादा चर्चा में रहा, क्योंकि जांच में अब तक वर्दीधारी ही शक के घेरे में हैं। वहीं आरपीएफ पोस्ट, गया के पास भी आपराधिक घटनाओं की लंबी फेहरिस्त है। पोस्ट कमांडर को हर बार जवाब देना पड़ता है।
गया जंक्शन के बाहर से लेकर अंदर तक की सुरक्षा इन्हीं दोनों एजेंसियों के जिम्मे है, फिर भी अपराध थम नहीं रहे। दूसरे स्टेशनों पर जब FIR दर्ज हो रही है तो गया जंक्शन की बदनामी भी साथ-साथ बढ़ रही है।
वीडियो बनाकर बता रहे यात्री
पिछले महीने के आखिरी दिन एक महिला यात्री का पर्स गया जंक्शन पर काट लिया गया। सोने के गहने चोरी हो गए। पीड़िता ने गंतव्य पर पहुंचकर वीडियो बनाकर लोगों को बताया कि गया जंक्शन पर उसके साथ क्या हुआ।
कोई पटना जाकर, कोई दिल्ली, कोई डीडीयू तो कोई अन्य स्टेशन पर शिकायत दर्ज करा रहा है। इससे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन शहर गया की छवि खराब हो रही है।
पितृपक्ष मेला सिर पर, सुरक्षा जरूरी
कुछ ही दिनों में विश्वप्रसिद्ध पितृपक्ष मेला शुरू होने वाला है। जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। ऐसे में रेल प्रशासन को भी यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा पर गंभीर मंथन करना होगा।
यदि अपराध की यही रफ्तार रही तो गया जंक्शन अपराधियों का अड्डा बन जाएगा और रेलवे के हिस्से आएगी सिर्फ बदनामी
रेल प्रशासन को समझना होगा
पितृपक्ष मेले में देश-विदेश से लाखों पिंडदानी आएंगे। एक भी अप्रिय घटना गया जंक्शन की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूमिल कर सकती है।
यात्रियों की मांग:
- प्लेटफॉर्म और सर्कुलेटिंग एरिया में RPF-GRP की संयुक्त गश्त बढ़े
- CCTV की लाइव मॉनिटरिंग 24×7 हो और कंट्रोल रूम सक्रिय रहे
- सादे लिबास में सुरक्षा बल तैनात हों
- हर कोच में स्कॉर्ट पार्टी अनिवार्य की जाए
- अनाउंसमेंट से यात्रियों को लगातार सतर्क किया जाए
