
देवब्रत मंडल, मगध लाइव | गया, 25 जून 2026
गया नगर निगम में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। दो सरकारी पत्रों में दर्ज तारीखों और आदेशों के बीच का विरोधाभास अब चर्चा का विषय बन गया है। सवाल उठ रहा है कि नगर आयुक्त पद पर हैं या नहीं, या फिर विशेषाधिकार का प्रयोग किया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
मामला दो पत्रों से जुड़ा है।
पहला पत्र कहता है कि नगर आयुक्त 24 जून 2026 की दोपहर बाद अपने पद पर नहीं रहेंगे। यानी 24 जून दोपहर के बाद वे पदभार मुक्त माने जाएंगे।
दूसरा पत्र 25 जून 2026 का है, जिसमें उसी नगर आयुक्त के हस्ताक्षर/आदेश से दंडात्मक कार्रवाई का उल्लेख किया गया है।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब 24 जून की दोपहर बाद साहब पद पर हैं ही नहीं, तो 25 जून को दंडात्मक कार्रवाई का आदेश कैसे जारी हो गया?
उठ रहे तीन सवाल
- क्या नगर आयुक्त 24 जून के बाद भी पद पर बने हुए हैं?
यदि हां, तो पहला पत्र गलत है। - यदि पद पर नहीं हैं, तो 25 जून का आदेश किस अधिकार से जारी हुआ?
क्या यह विशेषाधिकार का प्रयोग है या नियमों की अनदेखी? - क्या बैक डेट में आदेश जारी किए जा रहे हैं?
निगम के गलियारों में चर्चा है कि कागजों पर तारीखों का खेल चल रहा है।
अधिकारियों की चुप्पी
इस पूरे मामले पर नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा, “दोनों पत्र हमारे पास भी आए हैं। तकनीकी परीक्षण किया जा रहा है।”
जनता में भ्रम
गया नगर निगम में पहले से ही टैक्स, सफाई और नाला-उड़ाही को लेकर जनता में नाराजगी है। अब ‘पत्र-विरोधाभास’ से भ्रम और बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि जब अधिकारी ही तय नहीं कर पा रहे कि आयुक्त पद पर हैं या नहीं, तो जनता की समस्याएं कौन सुनेगा?
विशेषज्ञ बोले
प्रशासनिक मामलों के जानकार कहते हैं, “यदि कोई अधिकारी पदभार छोड़ चुका है तो उसके बाद उसके नाम से कोई प्रशासनिक या दंडात्मक आदेश जारी नहीं हो सकता। यदि ऐसा हुआ है तो वह आदेश शून्य माना जाएगा और जारी करने वाले के खिलाफ भी कार्रवाई बनती है।”
मगध लाइव के पास दोनों पत्र उपलब्ध हैं। नगर आयुक्त का पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनका जवाब नहीं मिला।
