देवब्रत मंडल

देवब्रत मंडल, गया जी। गुरुवार, 06 अगस्त की दोपहर गया जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर एक ऐसा दृश्य कैमरे में कैद हुआ, जिसने स्टेशन पर यात्री सुविधाओं और मानवीय गरिमा से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
प्लेटफॉर्म पर एक मालगाड़ी खड़ी थी। इसी दौरान तेज रफ्तार से एक ऑटो रिक्शा प्लेटफॉर्म पर आगे बढ़ता दिखाई दिया। पहली नजर में लगा कि किसी व्यापारी का बुक किया गया पार्सल लेने आया होगा। लेकिन कुछ ही देर में ऑटो प्लेटफॉर्म नंबर-1 के दिल्ली छोर पर जाकर रुका, जहां कुछ सामान रखा था। ऑटो चालक उन पैकेटों को हटाने लगा। तभी मौके पर पहुंचने पर पूरी तस्वीर साफ हुई।
वह ऑटो किसी पार्सल के लिए नहीं, बल्कि एक शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने आया था। पास में मौजूद रेल पुलिसकर्मियों ने बताया कि शव को अस्थायी शवगृह से निकालकर नियमानुसार अंतिम संस्कार के लिए भेजा जाना है।

सड़ांध से परेशान यात्री, नाक पर रुमाल रखकर खड़े रहे कर्मचारी
शवगृह से उठ रही तेज दुर्गंध इतनी असहनीय थी कि वहां मौजूद रेल पुलिसकर्मी और अन्य लोग नाक पर रुमाल रखे या हाथ से नाक ढके खड़े थे। कुछ देर बाद दो युवक पहुंचे, जिन्होंने बताया कि वे गोह थाना क्षेत्र के एक गांव से आते हैं और लावारिस शवों के अंतिम संस्कार का कार्य करते हैं। थोड़ी देर बाद शव को ऑटो रिक्शा पर रखा गया।
इसी बीच “कालिया” नामक व्यक्ति भी वहां पहुंचा, जो शवों के अंतिम संस्कार से जुड़ा कार्य करता है। देर से पहुंचने पर पुलिसकर्मियों ने उसे फटकार भी लगाई। इसके बाद वह शव के साथ ऑटो पर बैठ गया और वाहन प्लेटफॉर्म नंबर-1 से होकर रवाना हो गया।
शौचालय, पार्सल कार्यालय और आरएमएस के पास बना अस्थायी शवगृह
सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिस स्थान पर शव रखा जाता है, उसके आसपास रेलवे का पार्सल कार्यालय, ठेके पर संचालित सार्वजनिक शौचालय और आरएमएस कार्यालय स्थित हैं। शव को लेकर जब ऑटो इन कार्यालयों के सामने से गुजरा तो वहां मौजूद कर्मचारी, पार्सल मजदूर और व्यवसायी दुर्गंध से बचने के लिए अपने-अपने कमरों में चले गए।
72 घंटे तक पहचान का इंतजार, फिर रेलवे ने कराया अंतिम संस्कार
जानकारी के अनुसार, 02 अगस्त को रेल क्षेत्र में एक व्यक्ति की मौत हुई थी। पोस्टमार्टम के बाद शव को पहचान के लिए 72 घंटे तक रखा गया। निर्धारित अवधि में पहचान नहीं होने पर रेल पुलिस ने नियमों के तहत उसका अंतिम संस्कार कराया।
प्रीमियम ट्रेनों के प्लेटफॉर्म पर यह व्यवस्था कितनी उचित?
प्लेटफॉर्म नंबर-1 गया जंक्शन का सबसे महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म है। वंदे भारत, राजधानी एक्सप्रेस सहित कई प्रीमियम ट्रेनों का परिचालन इसी प्लेटफॉर्म से होता है। प्रतिदिन हजारों यात्री यहां से गुजरते हैं। ऐसे में शवों को अस्थायी रूप से इसी परिसर में रखना और अंतिम संस्कार के लिए खुले प्लेटफॉर्म से ले जाना यात्रियों की भावनाओं, स्टेशन की गरिमा और स्वच्छ वातावरण—तीनों पर सवाल खड़े करता है।
400 करोड़ के विश्वस्तरीय स्टेशन पर अब तक स्थायी शवगृह क्यों नहीं?
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से गया जंक्शन को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस किया जा रहा है। आधुनिक भवन, यात्री सुविधाएं और अत्याधुनिक तकनीक पर काम हो रहा है, लेकिन आज भी स्टेशन पर एक सम्मानजनक, शीतयुक्त स्थायी शवगृह का अभाव है।
रेलवे बोर्ड से लेकर पूर्व मध्य रेल मुख्यालय और डीडीयू मंडल के वरिष्ठ अधिकारी लगातार गया जंक्शन का दौरा करते रहते हैं। इसके बावजूद इस बुनियादी और मानवीय आवश्यकता की अनदेखी लंबे समय से जारी है।
MagadhLive ने इस गंभीर मुद्दे को लगातार प्रमुखता से उठाया है। इसका असर अब दिखाई भी देने लगा है और रेलवे अधिकारियों के बीच स्थायी शवगृह निर्माण की चर्चा शुरू हुई है। उम्मीद है कि यह चर्चा जल्द निर्णय में बदलेगी, ताकि मृतकों की गरिमा, यात्रियों की सुविधा और स्टेशन की स्वच्छ छवि—तीनों सुरक्षित रह सकें।
…अंत में
किसी भी विश्वस्तरीय स्टेशन की पहचान केवल आधुनिक इमारतों से नहीं, बल्कि उसकी मानवीय संवेदनशीलता से भी होती है।
