देवब्रत मंडल

गया रेल थाना के चर्चित सोना लूटकांड में 21 नवंबर 2025 से फरार चल रहे चार नामजद सिपाहियों में से तीन ने सोमवार को एसीजेएम-5 सौम्या की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत ने आत्मसमर्पण करने वाले सिपाही अभिषेक चतुर्वेदी, करण कुमार और आनंद मोहन को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में केंद्रीय कारा, गया भेज दिया। हालांकि इस मामले का चौथा आरोपी सिपाही रंजन कुमार अभी भी फरार है।
एक आरोपी अब भी फरार, एसआईटी की तलाश जारी
फरार सिपाही रंजन कुमार पटना जिले के रानीतालाब का रहने वाला है, जबकि उसका ससुराल गया जिले के बेलागंज थाना क्षेत्र में बताया जाता है। एसआईटी उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।
कहां के रहने वाले हैं सरेंडर करने वाले तीनों सिपाही
न्यायिक हिरासत में भेजे गए सिपाही करण कुमार भोजपुर (आरा) जिले के निवासी हैं। अभिषेक चतुर्वेदी छपरा जिले के रहने वाले हैं, जबकि आनंद मोहन सीतामढ़ी के निवासी हैं। घटना के बाद से चारों सिपाही फरार चल रहे थे।
हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, फिर किया सरेंडर
चारों फरार सिपाहियों के खिलाफ जनवरी 2026 में गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था। गिरफ्तारी से बचने के लिए सभी ने पटना हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी, लेकिन 6 जुलाई 2026 को हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी की जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके बाद एसआईटी ने गिरफ्तारी के लिए दबिश तेज कर दी। लगातार छापेमारी के बीच तीनों आरोपियों ने 20 जुलाई 2026 को अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी।
रिमांड पर लेकर हो सकती है गहन पूछताछ
सूत्रों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले तीनों सिपाहियों को एसआईटी पूछताछ के लिए रिमांड पर लेने की तैयारी कर सकती है। जांच टीम इस मामले में पहले ही आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। अधिकारियों का मानना है कि इन तीनों से पूछताछ के दौरान लूट की पूरी साजिश और उसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
कोडरमा में बनी थी लूट की साजिश
जांच में सामने आया है कि गया रेल थाना के आरोपी सिपाही बिना किसी अधिकृत आदेश के अपने कार्यक्षेत्र से बाहर कोडरमा चले गए थे। वहीं कथित रूप से इस लूट की योजना बनाई गई। इसके बाद हावड़ा-बीकानेर (जोधपुर) एक्सप्रेस के गया जंक्शन पहुंचने से पहले सोना कारोबारी के कर्मचारी धनञ्जय शाश्वत से लूट की वारदात को अंजाम दिया गया।
डेढ़ करोड़ के करीब एक किलो सोना लूटा गया था
यह सनसनीखेज वारदात 21 नवंबर 2025 को हुई थी। आरोप है कि गया रेल थाना के सिपाहियों ने दो बाहरी व्यक्तियों मो. परवेज आलम और पूर्व चालक सीताराम के साथ मिलकर सोना कारोबारी मनोज कुमार सोनी के कर्मचारी धनञ्जय शाश्वत से करीब एक किलोग्राम सोना लूट लिया था। उस समय बरामदगी के अनुसार इसकी कीमत लगभग डेढ़ करोड़ रुपये आंकी गई थी।
रेल पुलिस की भूमिका भी रही सवालों के घेरे में
मामले की जांच शुरू होने के बाद रेल पुलिस की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई थी। तत्कालीन गया रेल थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर राजेश कुमार सिंह को निलंबित कर गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल वह जमानत पर बाहर हैं और उनके विरुद्ध विभागीय जांच भी जारी है।
सराफा कारोबारी और अन्य आरोपी भी पहुंचे थे जेल
कांड संख्या 334/25 में गया सराफा मंडी के कारोबारी मोहित अग्रवाल उर्फ गोलू को भी एसआईटी ने लूट का सोना खरीदने और बेचने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। उसके पास से करीब 100 ग्राम सोना बरामद किया गया था। वह भी फिलहाल जमानत पर बाहर है। वहीं एक अन्य आरोपी मो. परवेज आलम ने गिरफ्तारी के डर से रेलवे न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था और 11 जुलाई से जमानत पर बाहर है।
एसआईटी का नेतृत्व कर रहे एएसपी कर रहे हैं जांच
पूरे हाई-प्रोफाइल सोना लूटकांड की जांच के लिए गठित एसआईटी का नेतृत्व अपर रेल पुलिस अधीक्षक भास्कर रंजन कर रहे हैं। अब तीन सिपाहियों के आत्मसमर्पण के बाद जांच को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं फरार सिपाही रंजन कुमार की गिरफ्तारी और संभावित रिमांड पूछताछ पर सबकी नजरें टिकी हैं।
