गया में पांडुलिपि संरक्षण में बड़ी उपलब्धि: 1.21 लाख से अधिक पांडुलिपियों का सत्यापन, उत्कृष्ट कार्य करने वाले सम्मानित

Deobarat Mandal

ज्ञान भारतम मिशन के तहत समारोह आयोजित, डीएम शशांक शुभंकर ने किया सम्मान; बिहार में गया दूसरे स्थान पर

देवब्रत मंडल

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सम्मानित करते जिलापदाधिकारी


गया, 05 मई 2026: ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत पांडुलिपि संरक्षण एवं डिजिटाइजेशन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को समाहरणालय सभागार, गया में आयोजित एक समारोह में सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जिला पदाधिकारी गया शशांक शुभंकर ने अंगवस्त्र एवं प्रशस्ति पत्र देकर योगदानकर्ताओं को सम्मानित किया।
समारोह को संबोधित करते हुए डीएम ने कहा कि पांडुलिपि संरक्षण एवं डिजिटाइजेशन के क्षेत्र में गया जिला पूरे बिहार में दूसरे स्थान पर रहा है, जो जिले के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि इस कार्य में लगे लोगों की मेहनत से अन्य लोग भी प्रेरित होंगे और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में व्यापक जनसहभागिता बढ़ेगी।
जिले में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में यह पहल एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो रही है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्राचीन पांडुलिपियों को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित कर भविष्य की पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जा रहा है।
प्रशासन द्वारा बोधगया मठ, मगध विश्वविद्यालय पुस्तकालय, समाहरणालय पुस्तकालय, जिला अभिलेखागार सहित विभिन्न सरकारी एवं निजी स्थलों पर संरक्षित पांडुलिपियों का व्यापक सर्वेक्षण और सत्यापन कार्य किया गया। इस दौरान कुल 1,21,938 पांडुलिपियों का सफलतापूर्वक सत्यापन किया गया, जो जिले की समृद्ध ऐतिहासिक और साहित्यिक विरासत को दर्शाता है।
कार्यक्रम में पांडुलिपि संरक्षण में अहम भूमिका निभाने वाले शंभूनाथ विट्ठल, राजेंद्र कुमार सिजुआर, चिंटू लाल झांगर, रंजीत भैया, कृष्ण लाल भैया, विनोद लाल मेहरवार, अजय सिंह, बिके मंगलम, परमानंद मिश्रा, आकाश कुमार और संजय कुमार उर्फ स्वामी श्री सुदर्शन आचार्य महाराज समेत अन्य लोगों को सम्मानित किया गया।
इस आयोजन का उद्देश्य पांडुलिपि संरक्षण के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना, इस क्षेत्र में कार्यरत लोगों को प्रोत्साहित करना और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों को मजबूत करना है।
समारोह में विभिन्न विभागों के अधिकारी, शिक्षाविद, शोधकर्ता, साहित्यकार और अभिलेखागार विशेषज्ञ उपस्थित रहे। इस दौरान पांडुलिपि संरक्षण एवं डिजिटाइजेशन से जुड़े अनुभव, चुनौतियां और उपलब्धियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। यह आयोजन जिले की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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