देवब्रत मंडल

नगर निगम गया की सियासत इन दिनों पूरी तरह गरमा चुकी है। 29 मई को होने वाले सशक्त स्थायी समिति के सात सदस्यों के चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। डीआरडीए कार्यालय परिसर में सुबह से मतदान प्रक्रिया शुरू होगी, लेकिन मतदान से पहले ही पार्षदों की गोलबंदी, बैठकों और रणनीतियों का दौर चरम पर पहुंच गया है। गया नगर निगम में 29 मई को होने वाले सशक्त स्थायी समिति के सात सदस्यों के चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। चुनाव की सभी प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शुक्रवार की सुबह गया जिला विकास अभिकरण (डीआरडीए) कार्यालय परिसर में मतदान प्रक्रिया शुरू होगी।
झारखंड यात्रा चर्चा का विषय बना
चुनाव को लेकर संभावित उम्मीदवारों ने भी अपनी-अपनी तैयारी लगभग पूरी कर ली है। महिला पार्षदों के साथ-साथ कई पुरुष पार्षद भी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। लेकिन चुनावी माहौल के बीच एक बार फिर पार्षद एवं इनके प्रतिनिधियों की झारखंड यात्रा चर्चा का विषय बन गई है। बताया जा रहा है कि महिला पार्षदों के पुरुष प्रतिनिधियों को एक बार फिर झारखंड की प्राकृतिक वादियों(झुमरीतिलैया) की सैर पर ले जाया गया है। इससे पहले 17 अप्रैल को प्रस्तावित चुनाव के दौरान भी इसी तरह का घटनाक्रम सामने आया था। उस समय चुनाव टल गया था, लेकिन पार्षदों और प्रतिनिधियों की झारखंड यात्रा ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं।
एक बार फिर झारखंड की सैर पर निकले
नगर निगम की गलियारों में अब यह चर्चा आम हो गई है कि आखिर बार-बार झारखंड की ही सैर क्यों कराई जा रही है। राजनीतिक जानकार इसे चुनावी गोलबंदी और अपने पक्ष में समर्थन सुनिश्चित करने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं। झारखंड “उन्मुक्त गगन” है जहां के हवा पानी में एक “विशेष उर्जा” मिलती है। वैसे भी झारखंड कभी बिहार की ग्रीष्म ऋतु में राजधानी हुआ करती थी।
पहली बार मतदान के जरिए हो रहा चयन
दरअसल, यह पहली बार है जब सशक्त स्थायी समिति के सात सदस्यों का चयन लोकतांत्रिक तरीके से मतदान के जरिए हो रहा है। इससे पहले मेयर अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए समिति के सदस्यों का चयन करते थे। लेकिन इस बार पार्षदों को अपने विवेक और मताधिकार का प्रयोग कर सदस्यों का चुनाव करना है।
जीत-हार पार्षदों के समर्थन व रणनीति पर निर्भर
नगर निगम के प्रत्येक पार्षद को सात वोट देने का अधिकार प्राप्त है। यही वजह है कि असली राजनीतिक संघर्ष अब शुरू हो चुका है। कोई भी पार्षद नामांकन दाखिल कर चुनाव मैदान में उतर सकता है। नामांकन सही पाए जाने के बाद उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा होगी। इसके बाद उम्मीदवारों की जीत-हार पूरी तरह पार्षदों के समर्थन और रणनीति पर निर्भर करेगी।
देर रात तक चल रहा है जनसंपर्क अभियान
पूर्व के कई सदस्य इस बार भी चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं, वहीं कई नए चेहरे भी मैदान में उतर सकते हैं। जनसंपर्क अभियान अब तेज हो गया है। संभावित उम्मीदवार देर रात तक पार्षदों से संपर्क साधने और समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं। सुबह पौ फटने के साथ ही पार्षदों के दरवाजे पर स्व घोषित उम्मीदवार आरजू मिन्नतें करने के लिए पहुंच जा रहे हैं। एक वोट और एक मौका देने की अपील कर रहे हैं।
इस बार बदलाव की चर्चा जोरों पर
नगर निगम की राजनीति में बैठकों और बैठकबाजी का दौर भी लगातार जारी है। कोई अपने समर्थक मजबूत करने में जुटा है तो कोई विरोधियों की रणनीति विफल करने में। हालांकि इस बार बदलाव की चर्चा भी तेज है। माना जा रहा है कि पूर्व के कुछ सदस्यों की वापसी हो सकती है, लेकिन सभी पुराने चेहरों की राह आसान नहीं दिख रही।
अब सबकी निगाहें 29 मई को होने वाले मतदान और उसके बाद आने वाले परिणामों पर टिकी हैं। यह चुनाव केवल सात सदस्यों के चयन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे नगर निगम की बदलती राजनीतिक दिशा और पार्षदों के स्वतंत्र विवेक की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है।
मतदान के बाद ही साफ हो पाएगा कि नगर निगम में बदलाव की बयार बह रही थी या फिर पुराने चेहरे ही दोबारा सत्ता के केंद्र में लौटेंगे।
