न्यूज़ डेस्क, मगध लाइव

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से देश की सियासत में एक एक महत्वपूर्ण उथल पुथल माना जा रहा है। ऐसे में यह जान लेना जरूरी है कि कॉक्रोच जनता पार्टी(CJP) और अभिजीत दीपके रातों रात कैसे विश्व पटल पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। मई 2026 में भारत के न्यायिक और सोशल मीडिया परिदृश्य में उत्पन्न हुए एक प्रमुख विवाद के बाद यह आंदोलन अस्तित्व में आया। इसकी उत्पत्ति 15 मई 2026 को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत द्वारा एक अदालती सुनवाई के दौरान की गई उस मौखिक टिप्पणी के विरोध में हुई थी, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर बेरोजगार युवाओं की तुलना “तिलचट्टों” और “समाज के परजीवियों” से की थी।
अपनी स्थापना के कुछ ही दिनों के भीतर, इस आंदोलन ने 3,50,000 से अधिक आधिकारिक पंजीकरण प्राप्त कर लिए और इंस्टाग्राम पर इसके 3 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स हो गए। यह आंदोलन केवल डिजिटल दुनिया तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसने ज़मीनी स्तर पर भी कई गतिविधियाँ की हैं; जहाँ पार्टी के स्वयंसेवक ‘कॉकक्रोच’ की वेशभूषा पहनकर विरोध प्रदर्शनों और सफाई अभियानों में हिस्सा लेते हैं।
यद्यपि यह आंदोलन वर्तमान में भारत निर्वाचन आयोग के तहत एक राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत नहीं है, फिर भी यह भारतीय युवाओं को प्रभावित करने वाले व्यापक सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों के खिलाफ सक्रिय रूप से अभियान चला रहा है।
पृष्ठभूमि और गठन
इस आंदोलन की उत्पत्ति मई 2026 में सर्वोच्च न्यायालय में हुई एक सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कान्त के द्वारा की गई विवादास्पद टिप्पणियों से हुई।
अदालती विवाद और सीजेआई की टिप्पणी
दिल्ली में वकीलों के पदनाम से जुड़े एक मामले में संजय दुबे नामक एक वकील ने न्यायालय में याचिका दायर की थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने जब इसे समय की बर्बादी बताते हुए खारिज कर दिया, तो इंटरनेट पर वकीलों के आचरण को लेकर भी बहस छिड़ गई। इसी दौरान, सीजेआई सूर्य कांत ने फर्जी डिग्रियों वाले वकीलों और इंटरनेट पर भड़ास निकालने वाले लोगों की आलोचना करते हुए एक विवादास्पद तुलना कर दी।
सीजेआई ने टिप्पणी की: “कॉकरोच (तिलचट्टे) जैसे युवा हैं; जिन्हें कोई रोज़गार नहीं मिलता… वे मीडिया, सोशल मीडिया या आरटीआई कार्यकर्ता बनकर हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं, वे परजीवियों की तरह हैं।”
चूँकि यह टिप्पणी देश के सर्वोच्च न्यायिक पद से आई थी, इसलिए इसने तुरंत राष्ट्रीय मीडिया का ध्यान खींचा। बेरोज़गार युवाओं और छात्रों ने इसे अपना अपमान माना और सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश व्यक्त किया। विवाद बढ़ने पर, 16 मई 2026 को सीजेआई ने स्पष्टीकरण दिया कि उनकी टिप्पणी केवल उन फर्जी लोगों के लिए थी जो जाली डिग्रियों के सहारे महान पेशों में घुसपैठ करते हैं, न कि देश के युवाओं के लिए।
आंदोलन की शुरुआत
आधिकारिक स्पष्टीकरण के बावजूद, देश के युवाओं ने “कॉकरोच” शब्द को एक हथियार के रूप में अपना लिया। 16 मई 2026 को डिजिटल संचार रणनीतिकार अभिजीत डिप्के ने सत्तारूढ़ व्यवस्था पर व्यंग्य करते हुए एक्स पर “कॉकरोच जनता पार्टी” के गठन की घोषणा की। यह नाम सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी पर एक कटाक्ष था।
“आलसी और बेरोजगारों की आवाज़” टैगलाइन के साथ शुरू हुआ यह मंच रातों-रात वायरल हो गया। इसके घोषणापत्र और ग्राफिक्स को तैयार करने के लिए चैटजीपीटी और क्लॉड जैसे एआई उपकरणों का उपयोग किया गया। लॉन्च होने के महज़ पाँच दिनों के भीतर, इसके इंस्टाग्राम फॉलोअर्स की संख्या 1 करोड़ को पार कर गई, जिसने भाजपा के आधिकारिक हैंडल को भी पीछे छोड़ दिया। 22 मई 2026 तक यह संख्या 2 करोड़ के पार पहुँच गई और जल्द ही यह ऑनलाइन अभियान कई राज्यों में ज़मीनी विरोध प्रदर्शनों में बदल गया।[13]
संस्थापक के बारे में
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके का जन्म 1995 में महाराष्ट्र के औरंगाबाद में हुआ था। पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद, उन्होंने अमेरिका के बोस्टन विश्वविद्यालय से जनसंपर्क में मास्टर डिग्री हासिल की।
2020 से 2023 तक दिपके आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम में काम किया और दिल्ली चुनावों के दौरान युवा मतदाताओं के लिए डिजिटल अभियान चलाए। 2023 में वे विदेश में पढ़ाई के लिए पार्टी से अलग हो गए थे। डिप्के अब सीजेपी को उन युवाओं के लिए एक “मंच” बताते हैं जो खुद को मुख्यधारा की राजनीति से अलग-थलग महसूस करते हैं। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जब मीडिया ने इनसे पूछा कि क्या आप राजनीति में आना चाहेंगे तो इन्होंने राजनीति में आने से इंकार कर दिया। भविष्य में क्या होगा, ये अभी कुछ कहा नहीं जा सकता।
