देवब्रत मंडल

अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्टेशन बनने की ओर बढ़ रहे गया जंक्शन पर अपराध का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है। हालात ये हैं कि यहां लहसुन की बोरी तक चोरी हो जा रही है।
छोटी-बड़ी हर चीज निशाने पर
आम यात्रियों का पर्स कटना, ट्रेन की खिड़की से मोबाइल झपटना अब रोज की बात हो गई है। स्टेशन के बाहरी हिस्से से मोटरसाइकिल गायब हो रही हैं। ताजा मामला एक यात्री की बोरी में रखे लहसुन की चोरी का है।
जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं
पिछले साल नवंबर में सामने आए चर्चित सोना लूटकांड में तत्कालीन रेल थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह समेत चार सिपाहियों की संलिप्तता सामने आई। तीन आरोपियों पर चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है। बाहरी लोगों की मदद से क्राइम को अंजाम देने के आरोप हैं।
पत्रकार तक नहीं बचे
बढ़ते अपराध की चपेट में आकाशवाणी के एक पत्रकार भी आ चुके हैं, जिनकी बाइक स्टेशन परिसर से चोरी हो गई। एक अन्य पत्रकार की एफओबी से उतरते समय पॉकेटमारी हो गई। महिला हो या पुरुष, कोई यात्री सुरक्षित नहीं।
बदनाम होती छवि
एनआरआई स्वेता शर्मा ने यहां हुई चोरी की शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा दी है। कई पीड़ित यात्री गया में केस दर्ज न कराकर अपने गंतव्य पर शिकायत दर्ज करा रहे हैं, जिससे हर जगह गया जंक्शन की बदनामी हो रही है।
सुरक्षा सिर्फ कागजों में
रेलवे और आरपीएफ चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा का दावा करते हैं, लेकिन फाइलों में दर्ज केस कुछ और ही बयां करते हैं। जांच के नाम पर सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं। शराब तस्करी के मामले भी बढ़े हैं – कुछ पकड़े जाते हैं, कई ‘छूट’ जाते हैं।
पर्यटन पर असर
देश-विदेश से पर्यटक और सालभर तीर्थयात्री यहां आते हैं। कुछ महीनों में ही चोरी की घटनाओं ने स्टेशन की छवि धूमिल कर दी है। क्राइम कंट्रोल की जगह अब डैमेज कंट्रोल की बात हो रही है।
सवाल बड़ा है – जब पुलिस पर ही सवाल हों, तो आम यात्री की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा?
