बागेश्वरी गुमटी आरओबी निर्माण में नई अड़चन: जलापूर्ति पाइपलाइन, मंदिर और अतिक्रमण से धीमी पड़ी रफ्तार

Deobarat Mandal

देवब्रत मंडल

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गया जी। गया शहर के बागेश्वरी गुमटी के पास निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) परियोजना को लेकर एक नई चुनौती सामने आई है। कई तकनीकी और स्थानीय बाधाओं के कारण निर्माण कार्य की गति पहले की तुलना में धीमी पड़ गई है। परियोजना से जुड़े अभियंताओं का कहना है कि यदि इन समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ तो कार्य की समय-सीमा भी प्रभावित हो सकती है।

जलापूर्ति पाइपलाइन बनी सबसे बड़ी बाधा

निर्माण कार्य में लगे अभियंताओं के अनुसार बागेश्वरी सड़क के किनारे बुडको द्वारा बिछाई गई जलापूर्ति पाइपलाइन सबसे बड़ी परेशानी बन गई है। इसी स्थान पर आरओबी के पिलरों के फाउंडेशन के लिए गहरी खुदाई होनी है। यदि खुदाई की जाती है तो पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने की आशंका है, जिससे आसपास के कई घरों की जलापूर्ति बाधित हो सकती है।
अभियंताओं ने बताया कि इस संबंध में बुडको के अधिकारियों से कई बार बातचीत की गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। यही कारण है कि निर्माण कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

शिव मंदिर, पीपल का पेड़ और नाली भी बनी चुनौती

निर्माण स्थल पर एक छोटा शिव मंदिर, उसके समीप स्थित पीपल का वृक्ष और सड़क के नीचे से गुजरने वाली एक छोटी नाली भी तकनीकी बाधा बन गई है। मशीन संचालकों का कहना है कि जब तक इन अवरोधों के संबंध में प्रशासनिक स्तर पर निर्णय नहीं होता, तब तक निर्धारित स्थान पर फाउंडेशन का कार्य करना जोखिम भरा है।
इसी वजह से फिलहाल उन स्थानों पर पिलरों का फाउंडेशन तैयार किया जा रहा है, जहां इस प्रकार की कोई बाधा मौजूद नहीं है।

अतिक्रमण और वाहनों की आवाजाही भी बढ़ा रही परेशानी


निर्माण एजेंसी के सामने अतिक्रमण भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। सड़क के दोनों किनारों पर अतिक्रमण के अलावा ऑटो और ई-रिक्शा चालकों द्वारा बार-बार मना करने के बावजूद कार्यस्थल के बेहद करीब वाहन खड़े कर दिए जाते हैं। इससे भारी मशीनों की आवाजाही और निर्माण कार्य प्रभावित हो रहा है।

भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में


इधर, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। अधिग्रहण की जद में आने वाले भवनों की मापी के साथ-साथ उनके मूल्यांकन का कार्य जारी है।
भू अर्जन कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार प्रभावित लोगों द्वारा दर्ज कराई गई अधिकांश आपत्तियों का अंचल कार्यालय स्तर पर निस्तारण लगभग पूरा हो चुका है। इसके बाद बहुत जल्द भूमि अधिग्रहण की औपचारिक कार्रवाई शुरू होने की संभावना है।

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