MagadhLive Special: मौत के बाद भी साथ निभाता है रेलवे, जानिए पार्थिव शरीर को निःशुल्क गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था

Deobarat Mandal

देवब्रत मंडल

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गया। पिछले दिनों MagadhLive ने गया जंक्शन पर एक मृत यात्री के शव के साथ होने वाली संवेदनहीन व्यवस्था को उजागर किया था। उस रिपोर्ट ने न सिर्फ आम लोगों को झकझोरा, बल्कि उन लोगों का भी ध्यान इस ओर खींचा जो अब तक इस व्यवस्था की हकीकत से अनजान थे। मृत्यु से लेकर शवगृह तक एक शव के सम्मानजनक सफर में आने वाली कठिनाइयों को हमारी विशेष रिपोर्ट ने सामने रखा।

इसी कड़ी में आज हम एक ऐसी जानकारी साझा कर रहे हैं, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। यह जानकारी बताती है कि दुख की इस घड़ी में भारतीय रेलवे मानवीय आधार पर किस तरह परिवारों का सहारा बनता है।

रेलवे देता है पार्थिव शरीर ले जाने की निःशुल्क सुविधा

image editor output image1408388408 17858430991014750918017008391528 MagadhLive Special: मौत के बाद भी साथ निभाता है रेलवे, जानिए पार्थिव शरीर को निःशुल्क गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था

यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु रेल क्षेत्र में दुर्घटना, स्वाभाविक कारण या किसी अन्य परिस्थिति में हो जाती है और परिजन पार्थिव शरीर को रेलमार्ग से अपने गंतव्य तक ले जाना चाहते हैं, तो भारतीय रेलवे यह सुविधा पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराता है।

इसके लिए मृतक के परिजनों को मृत्यु प्रमाणपत्र (डेथ सर्टिफिकेट) के साथ संबंधित रेलवे स्टेशन के पार्सल कार्यालय में आवेदन करना होता है। पार्सल कार्यालय द्वारा निर्धारित प्रपत्र भरने और आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बाद रेलवे आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कराता है।

ब्रेक वैन में भेजा जाता है पार्थिव शरीर

सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद रेलवे संबंधित ट्रेन की ब्रेक वैन (पार्सल बोगी) में पार्थिव शरीर को गंतव्य स्टेशन तक भेजने की व्यवस्था करता है। इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता।

हालांकि, इसके लिए कुछ शर्तें भी हैं। पार्थिव शरीर को कफन ही नहीं बल्कि कॉफिन (Coffin) में पूरी तरह सुरक्षित और सीलबंद होना चाहिए। साथ ही शव की लोडिंग और अनलोडिंग की जिम्मेदारी मृतक के परिजनों या उनके साथ आए लोगों की होती है। रेलवे कर्मचारी या पार्सल कार्यालय के मजदूर इस प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेते।

पहले लगता था शुल्क, अब सेवा पूरी तरह मुफ्त

रेलवे सूत्रों के अनुसार, पहले इस सुविधा के लिए निर्धारित शुल्क लिया जाता था और वजन की सीमा भी तय थी। लेकिन वर्तमान में केंद्र सरकार द्वारा यह सेवा मानवीय आधार पर पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है।

रेलवे के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि पिछले महीने ही मुंबई मेल से दो पार्थिव शरीरों को उनके गंतव्य तक बिना किसी शुल्क के भेजा गया था।

मानवीय पहलू को जानना भी जरूरी

दुख की घड़ी में अक्सर लोग ऐसी सुविधाओं से अनजान रहते हैं। ऐसे में यह जानकारी कई परिवारों के लिए राहत का कारण बन सकती है। रेलवे की यह व्यवस्था बताती है कि संवेदनशील परिस्थितियों में भी मानवीय सहयोग के लिए प्रावधान मौजूद हैं।

MagadhLive अपनी अगली कड़ी में बताएगा कि किसी मृतक के मामले में रेल प्रशासन और कौन-कौन सी सुविधाएं एवं प्रक्रियाएं उपलब्ध कराता है।

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