देवब्रत मंडल
तस्वीर झूठ नहीं बोलती, आधी हकीकत, आधा फ़साना

गया। कई बार जो दिखाई देता है, वास्तविकता उससे बिल्कुल अलग होती है। बागेश्वरी रोड पर लगा एक बोर्ड इन दिनों कुछ ऐसी ही कहानी बयां कर रहा है। सड़क किनारे बिहार राज्य पुल निर्माण निगम की ओर से लगाया गया सूचना बोर्ड लोगों को आगाह करता है कि “सावधान, आगे रास्ता बंद है”, लेकिन मौके की तस्वीर कुछ और ही कह रही है। सड़क पर लोगों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है और छोटे-बड़े वाहन लगातार गुजर रहे हैं।


दरअसल, बागेश्वरी रेलवे गुमटी (एलसी/गेट) के स्थान पर प्रस्तावित रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) निर्माण को लेकर यह सूचना लगाई गई है। करीब 100 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य गया शहर को लंबे समय से चली आ रही जाम की समस्या से राहत दिलाना है। इसके लिए पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा योजना का शिलान्यास किया जा चुका है तथा विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार भूमि पूजन भी कर चुके हैं।

हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि आरओबी निर्माण की दिशा में अब तक कोई बड़ा भौतिक कार्य दिखाई नहीं देता। निर्माण कार्य के लिए ट्रैफिक प्लान को मंजूरी मिल चुकी है और चयनित एजेंसी भी आवश्यक संसाधनों तथा बेस कैंप की व्यवस्था कर चुकी है। पुल निर्माण निगम के अधिकारी समय-समय पर बागेश्वरी रोड और पावरगंज-स्टेशन रोड का निरीक्षण भी करते रहे हैं, लेकिन निर्माण कार्य अभी तक धरातल पर शुरू नहीं हो सका है।
स्थिति यह है कि आरओबी के पिलर निर्माण के लिए सड़क पर एक गड्ढा तक नहीं खोदा गया है। सड़क किनारे मौजूद पेड़-पौधों और बिजली के तारों का स्थानांतरण भी पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे में “रास्ता बंद” की सूचना और वास्तविक स्थिति के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से इस परियोजना का इंतजार किया जा रहा है। अब राज्य में नई सरकार बनने के बाद भी लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर आरओबी निर्माण कार्य कब शुरू होगा और कब पूरा होगा। बागेश्वरी और आसपास के इलाकों के निवासियों के लिए यह सवाल आज भी एक यक्ष प्रश्न बना हुआ है।
लोगों की अपेक्षा है कि कागजों और बैठकों से आगे बढ़कर अब परियोजना को जमीन पर उतारा जाए, ताकि गया शहर को जाम की समस्या से स्थायी राहत मिल सके और बहुप्रतीक्षित बागेश्वरी आरओबी का सपना साकार हो सके।
